Bhīṣma’s Counsel on Reconciliation and Partition (भीष्मोपदेशः—संधि-राज्यविभागविचारः)
युधिछिर उवाच न मे वागनृतं प्राह नाधर्मे धीयते मतिः । वर्तते हि मनो मे5त्र नैषो5धर्म: कथंचन,युधिष्ठिरने कहा--मेरी वाणी कभी झूठ नहीं बोलती और मेरी बुद्धि भी कभी अधर्ममें नहीं लगती; परंतु इस विवाहमें मेरे मनकी प्रवृत्ति हो रही है, इसलिये यह किसी प्रकार भी अधर्म नहीं है। पुराणोंमें भी सुना जाता है कि धर्मात्माओंमें श्रेष्ठ जटिला नामवाली गौतम गोत्रकी कन््याने सात ऋषियोंके साथ विवाह किया था
yudhiṣṭhira uvāca | na me vāg anṛtaṃ prāha nādharme dhīyate matiḥ | vartate hi mano me 'tra naiṣo 'dharmaḥ kathaṃcana ||
యుధిష్ఠిరుడు అన్నాడు—నా వాక్కు ఎప్పుడూ అసత్యం పలకలేదు; నా బుద్ధి కూడా ఎప్పుడూ అధర్మంలో నిలవదు. అయినా ఈ వివాహం వైపు నా మనస్సు ఆకర్షితమవుతోంది; కాబట్టి ఇది ఏ విధంగానూ అధర్మం కాదు.
युधिछिर उवाच