Ādi-parva Adhyāya 141: Bhīma–Hiḍimba Confrontation and Protective Discourse
ततो विदिततवेद्यात्मा पाण्डवानां हिते रत: । पलायने मतिं चक्रे कुन्त्या: पुत्र: सहानघ:,विदुरजीने मन-ही-मन जाननेयोग्य सभी बातें जान लीं। वे सदा पाण्डवोंके हितमें संलग्न रहते थे, अतः निष्पाप विदुरने यही निश्चय किया कि कुन्ती अपने पुत्रोंके साथ यहाँसे भाग जाय
అప్పుడు సమస్త విషయాలను గ్రహించిన, పాండవుల హితంలో నిమగ్నుడైన నిర్దోషి విదురుడు—కుంతి తన కుమారులతో కలిసి ఇక్కడి నుండి పారిపోవాలని నిర్ణయించెను.
वैशम्पायन उवाच