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Shloka 41

Rāja-prabodhana and Prātaḥ-kṛtya

Awakening of the King and Morning Observances

विषं हन्त्युपयोक्तारं लक्ष्यभूतं तु हैहय / कुलं समूलं दहति ब्रह्मस्वारणिपावकः

viṣaṃ hantyupayoktāraṃ lakṣyabhūtaṃ tu haihaya / kulaṃ samūlaṃ dahati brahmasvāraṇipāvakaḥ

విషం దానిని సేవించినవానినే చంపుతుంది, హే హైహయ, లక్ష్యమైనవానిని; కానీ బ్రహ్మస్వ అరణి-పావకము వంశాన్ని వేరులతో సహా దహించేస్తుంది।

विषम्poison
विषम्:
कर्ता (Subject/कर्ता)
TypeNoun
Rootविष (प्रातिपदिक)
Formनपुंसकलिङ्ग; प्रथमा (1st/प्रथमा), एकवचन
हन्तिkills
हन्ति:
क्रिया (Action/क्रिया)
TypeVerb
Rootहन् (धातु)
Formलट् (Present/वर्तमान); परस्मैपद; प्रथमपुरुष (3rd), एकवचन
उपयोक्तारम्the user (consumer)
उपयोक्तारम्:
कर्म (Object/कर्म)
TypeNoun
Rootउप-युज् (धातु) → उपयोक्तृ (कृदन्त/नाम)
Formपुल्लिङ्ग; द्वितीया (2nd/द्वितीया), एकवचन; कर्तृवाचक नाम (user/consumer)
लक्ष्यभूतम्having become a target
लक्ष्यभूतम्:
विशेषण (Adjective of object/कर्म-विशेषण)
TypeAdjective
Rootलक्ष्य (कृदन्त/प्रातिपदिक) + भूत (कृदन्त/प्रातिपदिक)
Formनपुंसकलिङ्ग; द्वितीया (2nd/द्वितीया), एकवचन; तत्पुरुषः (लक्ष्यं भूतम् = having become a target)
तुbut/indeed
तु:
निपात (Particle/निपात)
TypeIndeclinable
Rootतु (अव्यय)
Formअव्यय; विरोध/अवधारणार्थ निपात (but/indeed)
हैहयO Haihaya
हैहय:
सम्बोधन (Address/सम्बोधन)
TypeNoun
Rootहैहय (प्रातिपदिक)
Formपुल्लिङ्ग; सम्बोधन (8th/सम्बोधन), एकवचन; वंश/व्यक्तिनाम
कुलम्family/lineage
कुलम्:
कर्म (Object/कर्म)
TypeNoun
Rootकुल (प्रातिपदिक)
Formनपुंसकलिङ्ग; द्वितीया (2nd/द्वितीया), एकवचन
समूलम्root and all; completely
समूलम्:
क्रियाविशेषण/विशेषण (Adverbial adjective/विशेषण)
TypeAdjective
Rootस (उपसर्ग/अव्यय) + मूल (प्रातिपदिक)
Formनपुंसकलिङ्ग; द्वितीया (2nd/द्वितीया), एकवचन; अव्ययीभावः (सम्/सह + मूल = with the root, utterly)
दहतिburns
दहति:
क्रिया (Action/क्रिया)
TypeVerb
Rootदह् (धातु)
Formलट् (Present/वर्तमान); परस्मैपद; प्रथमपुरुष (3rd), एकवचन
ब्रह्मस्वारणिपावकःthe fire (kindled) by Brahmin’s property (like a fire-drill)
ब्रह्मस्वारणिपावकः:
कर्ता (Subject/कर्ता)
TypeNoun
Rootब्रह्मस्व (प्रातिपदिक) + अरणि (प्रातिपदिक) + पावक (प्रातिपदिक)
Formपुल्लिङ्ग; प्रथमा (1st/प्रथमा), एकवचन; बहुपद-तत्पुरुषः (ब्रह्मस्वस्य अरणिः इव पावकः = fire like a fire-drill of Brahmin’s property)