मृत्यु-काल-प्रबोधनम् (Instruction on Mortality, Time, and Truth) — Mahābhārata, Śānti-parva 169
हितकी बात सुननेवाला सुहृद् दुर्लभ है तथा हितकारी सुहृद् भी दुर्लभ ही है। धर्मात्माओंमें श्रेष्ठ पितामह! इन सब प्रश्नोंका आप विशद विवेचन कीजिये ।। भीष्म उवाच संधेयान् पुरुषान् राजन्नसंधेयांश्व॒ तत्त्वतः । वदतो मे निबोध त्वं निखिलेन युधिषप्ठिर,भीष्मजीने कहा--राजा युधिष्ठिर! किनके साथ संधि (मित्रता) करनी चाहिये और किनके साथ नहीं? यह बात मैं तुम्हें ठीक-ठीक बता रहा हूँ। तुम सब कुछ ध्यान देकर सुनो
bhīṣma uvāca | sandheyān puruṣān rājan asandheyāṁś ca tattvataḥ | vadato me nibodha tvaṁ nikhilena yudhiṣṭhira ||
பீஷ்மர் கூறினார்— அரசே யுதிஷ்டிரா! யாருடன் உடன்பாடு (நட்பு) கொள்ள வேண்டும், யாருடன் கொள்ளக் கூடாது— இதனை நான் உண்மையின்படி சொல்கிறேன். முழுமையாகக் கவனித்து கேள்.
भीष्म उवाच