Virāṭa-parva Adhyāya 22 — Draupadī’s Abduction Attempt and Bhīma’s Suppression of the Kīcakas
वसन्ते वासिताहेतोर्बलवद्गजयोरिव । ऐसा कहकर महाबली भीमसेनने उसके पुष्पहार-विभूषित केश पकड़ लिये। कीचक भी बलवानोंमें श्रेष्ठ था। सिरके बाल पकड़ लिये जानेपर उसने बलपूर्वक झटका देकर उन्हें छुड़ा लिया और बड़ी फुर्तीसे पाण्डुनन्दन भीमको दोनों भुजाओंमें भर लिया। तदनन्तर क्रोधमें भरे हुए उन दोनों पुरुषसिंहोंमें बाहुयुद्ध होने लगा, मानो वसन्त-ऋतुमें हथिनीके लिये दो बलवान् गजराज एक-दूसरेसे जूझ रहे हों || ५२-५३ $ ।। कीचकानां तु मुख्यस्य नराणामुत्तमस्य च,एक ओर कीचकोंका प्रधान कीचक था, तो दूसरी ओर मनुष्योंमें श्रेष्ठ भीमसेन। जैसे पूर्वकालमें कपिश्रेष्ठ वाली और सुग्रीव दोनों भाइयोंमें घोर युद्ध हुआ था, वैसा ही इन दोनोंमें भी होने लगा। दोनों एक-दूसरेपर कुपित थे और परस्पर विजय पानेकी इच्छासे लड़ रहे थे
vasante vāsitāhetor balavad-gajayor iva |
वैशम्पायन उवाच— वसन्ते वासिताहेतोर्बलवद्गजयोरिव । तौ क्रुद्धौ पुरुषव्याघ्रौ बाहुयुद्धमवर्तत ॥ भीमसेनः पुष्पहारविभूषितकेशान् कीचकस्य जग्राह; स तु कीचकानां मुख्यो बली, वेगेन झटिति केशान् विमोच्य भीमं बाहुभ्यामालिलिङ्ग । ततः क्रोधसमाविष्टौ परस्परजयैषिणौ, वसन्ते हस्तिन्यर्थं द्वौ गजराजाविव, अन्योन्यमभ्ययुध्येताम् ॥
वैशम्पायन उवाच
Power is ethically meaningful only when aligned with dharma: Bhīma’s strength is portrayed as protective and corrective—used to defend Draupadī’s dignity and to curb Kīcaka’s coercive misuse of authority.
Bhīma and Kīcaka engage in fierce hand-to-hand grappling. Bhīma grabs Kīcaka by his flower-decked hair; Kīcaka breaks free and clinches Bhīma with both arms. Their struggle is compared to two powerful elephants battling in spring.