सूर्य–कर्णोपदेशः
Sūrya’s Counsel to Karṇa on Kīrti and the Kuṇḍala
यदि दास्यामि ते मार्ग सैन्यस्य व्रजतो55ज्ञया । अन्ये>प्याज्ञापयिष्यन्ति मामेवं धनुषो बलात्,“यदि मैं इस समय तुम्हारी आज्ञासे तुम्हें और लंका जाती हुई तुम्हारी सेनाको मार्ग दे दूँगा तो दूसरे लोग भी इसी प्रकार धनुषके बलसे मुझपर हुक्म चलाया करेंगे
yadi dāsyāmi te mārgaṃ sainyasya vrajato 'jñayā | anye 'py ājñāpayiṣyanti mām evaṃ dhanuṣo balāt ||
मार्कण्डेय उवाच— यदि दास्यामि ते मार्गं सैन्यस्य व्रजतोऽज्ञया । अन्येऽप्याज्ञापयिष्यन्ति मामेवं धनुषो बलात् ॥
मार्कण्डेय उवाच