कण्वोपदेशः—नश्वरबलविवेकः तथा मातलिगुणकेश्याः आख्यानारम्भः
Kaṇva’s Counsel on Impermanent Power; Opening of the Mātali–Guṇakeśī Narrative
नरनारायणौ यौ तौ तावेवार्जुनकेशवौ । विजानीहि महाराज प्रवीरौ पुरुषोत्तमौ,महाराज! अर्जुनमें असंख्य गुण हैं एवं भगवान् जनार्दन तो उनसे भी बढ़कर हैं। तुम भी कुन्तीपुत्र अर्जुनको अच्छी तरह जानते हो। जो दोनों महात्मा नर और नारायणके नामसे प्रसिद्ध हैं, वे ही अर्जुन और श्रीकृष्ण हैं। तुम्हें ज्ञात होना चाहिये कि वे दोनों पुरुषरत्न सर्वश्रेष्ठ वीर हैं
naranārāyaṇau yau tau tāvevārjunakeśavau | vijānīhi mahārāja pravīrau puruṣottamau ||
नरनारायणौ यौ तौ तावेवार्जुनकेशवौ । विजानीहि महाराज प्रवीरौ पुरुषोत्तमौ ॥
राम उवाच