Udyoga Parva 142: Vidura’s warning to Kuntī and Kuntī’s resolve to meet Karṇa
Gaṅgātīra encounter begins
पाण्डुरं गजमारूढो गाण्डीवी स धनंजय: । त्वया सार्थ हृषीकेश श्रिया परमया ज्वलन्,“श्रीकृष्ण! इसी प्रकार गाण्डीवधारी धनंजय भी आपके साथ श्वेत गजराजपर आरूढ़ हो अपनी परम कान्तिसे प्रकाशित होते हुए मुझे स्वप्रमें दृष्टिगोचर हुए हैं
pāṇḍuraṃ gajamārūḍho gāṇḍīvī sa dhanañjayaḥ | tvayā sārtha hṛṣīkeśa śriyā paramayā jvalan ||
सञ्जय उवाच—पाण्डुरं गजमारूढो गाण्डीवी स धनञ्जयः। त्वया सार्धं हृषीकेश श्रिया परमया ज्वलन्॥
संजय उवाच