स्वर्गारोहणपर्व — तृतीयोऽध्यायः
Indra and Dharma’s Consolation; Celestial Gaṅgā Purification
ववौ देवसमीपस्थ: शीतलो5तीव भारत | कुरुकुलनन्दन राजा युधिष्ठिरने वहाँ चारों ओर जो विकृत शरीर देखे थे वे सभी अदृश्य हो गये। तदनन्तर वहाँ पावन सुगन्ध लेकर बहनेवाली पवित्र सुखदायिनी वायु चलने लगी। भारत! देवताओंके समीप बहती हुई वह वायु अत्यन्त शीतल प्रतीत होती थी
ववौ देवसमीपस्था शीतला तीव भारत । युधिष्ठिरस्य दृष्टानि विकृतानि शरीरिणाम् ॥ सर्वाण्यदृश्यतां यान्ति तदनन्तरमेव हि । ततो गन्धवहा पुण्या सुखदा पावनी अनिला ॥ प्रववौ देवसमीपस्था शीतला तीव भारत ॥
वैशम्पायन उवाच