शोक-शमन उपदेशः
Instruction on the Pacification of Grief
अशाश्रृतमिदं सर्व चिन्त्यमानं नरर्षभ | कदलीसंनिभो लोक: सारो हास्य न विद्यते,नरश्रेष्ठ विचार करनेपर यह सारा जगत् अनित्य ही जान पड़ता है। सम्पूर्ण विश्व केलेके समान सारहीन है; इसमें सार कुछ भी नहीं है
aśāśvatam idaṁ sarvaṁ cintyamānaṁ nararṣabha | kadalī-sannibho lokaḥ sāro hy asya na vidyate ||
अशाश्वतमिदं सर्वं चिन्त्यमानं नरर्षभ। कदलीसन्निभो लोकः सारो ह्यस्य न विद्यते॥
विदुर उवाच