Śuka’s Guṇa-Transcendence and Vyāsa’s Consolation (शुकगति-वर्णनम्)
नास्मि वर्णोत्तमा जात्या न वैश्या नावरा तथा । तव राजन् सवर्णास्मि शुद्धयोनिरविप्लुता,राजन! मैं जातिसे ब्राह्मणी नहीं हूँ और न वैश्या अथवा शाूद्वा ही हूँ। मैं तो आपके समान वर्णवाली क्षत्रिया ही हूँ। मेरा जन्म शुद्ध वंशमें हुआ है और मैंने अखण्ड ब्रह्मचर्यका पालन किया है
bhīṣma uvāca | nāsmi varṇottamā jātyā na vaiśyā nāvarā tathā | tava rājan savarṇāsmi śuddhayonir aviplutā ||
नास्मि वर्णोत्तमा जात्या न वैश्या नावरा तथा । तव राजन् सवर्णास्मि शुद्धयोनिरविप्लुता ॥
भीष्य उवाच