Śuka–Janaka Saṃvāda: Āśrama-krama, Jñāna-vijñāna, and the Marks of Liberation (शुक-जनक संवादः)
परितापो5भिहरणं हीनाशो5नार्जवं तथा । भेद: परुषता चैव काम: क्रोधो मदस्तथा,रूप, ऐश्वर्य, विग्रह, त्यागकका अभाव, करुणाका अभाव, दुःख-सुखका उपभोग, परनिन्दामें प्रीति, वाद-विवाद करना, अहंकार, माननीय पुरुषोंका सत्कार न करना, चिन्ता, वैरभाव रखना, संताप करना, दूसरोंका धन हड़प लेना, निर्लज्जता, कुटिलता, भेदबुद्धि, कठोरता, काम, क्रोध, मद, दर्द, द्वेष और बहुत बोलनेका स्वभाव--यह रजोगुणका समूह है। ये सारे भाव रजोगुणके कार्य बताये गये हैं। अब मैं तामस भावोंके समूहका परिचय देता हूँ, ध्यान देकर सुनो
yājñavalkya uvāca | paritāpo 'bhiharaṇaṃ hīnāśo 'nārjavaṃ tathā | bhedaḥ paruṣatā caiva kāmaḥ krodho madas tathā |
याज्ञवल्क्य उवाच—परितापोऽभिहरणं हीनाशोऽनार्जवं तथा । भेदः परुषता चैव कामः क्रोधो मदस्तथा ॥ एते रजोगुणकार्याणि; एभिर्नरः संघर्षं ग्रहणं च विवादीभावं च प्राप्नोति, विवेकं चाच्छादयति, धर्मसंयमं च शिथिलयति।
याज़्वल्क्य उवाच