Śuka’s Nirveda: Vyāsa’s Admonition on Dharma, Impermanence, and ‘Imperishable Wealth’ (अक्षय-धन)
उपासीनमुपासीन: प्रणम्य शिरसा मुनिम् | पश्चादनुमतस्तेन पप्रच्छ वसुमानिदम्,पास ही बैठे हुए मुनिको मस्तक झुकाकर प्रणाम करके वह राजकुमार उनके समीपमें ही बैठ गया। उसका नाम वसुमान् था। उसने महर्षिकी आज्ञा लेकर उनसे इस प्रकार पूछा --[
upāsīnam upāsīnaḥ praṇamya śirasā munim | paścād anumatas tena papraccha vasumān idam ||
उपासीनमुपासीनः प्रणम्य शिरसा मुनिम् । पश्चादनुमतस्तेन पप्रच्छ वसुमानिदम् ॥
भीष्म उवाच