Śoka-śamana: Kṛṣṇa’s Consolation and Nārada’s Exempla to Sṛñjaya
Chapter 29
'सृंजय! इक्ष्वाकुवंशी पुरुषसिंह महामना सगर भी मरे थे, ऐसा सुननेमें आया है। उनका पराक्रम अलौकिक था ।। षष्टि: पुत्रसहस्राणि यं यान्तमनुजम्मिरे । नक्षत्रराजं वर्षान्ति व्यभ्रे ज्योतिर्गणा इव,'जैसे वर्षकि अन्त (शरद) में बादलोंसे रहित आकाशके भीतर तारे नक्षत्रराज चन्द्रमाका अनुसरण करते हैं, उसी प्रकार राजा सगर जब युद्ध आदिके लिये कहीं यात्रा करते थे, तब उनके साठ हजार पुत्र उन नरेशके पीछे-पीछे चलते थे
Sṛñjaya! Ikṣvākuvaṁśī puruṣasiṁha mahāmanā Sagara api mare the, iti śrūyate. Tasya parākramaḥ alaukikaḥ. Ṣaṣṭiḥ putrasahasrāṇi yaṁ yāntam anujajmire; nakṣatrarājaṁ varṣānte vyabhre jyotirgaṇā iva.
सृंजय! इक्ष्वाकुवंशी पुरुषसिंहो महामना सगरोऽपि मृत इति श्रूयते; तस्य पराक्रमोऽलौकिकः । षष्टिः पुत्रसहस्राणि यं यान्तमनुजग्मिरे । नक्षत्रराजं वर्षान्ते व्यभ्रे ज्योतिर्गणा इव ॥
वायुदेव उवाच