तृष्णाक्षय-उपदेशः
Instruction on the Cessation of Craving
नैव त्यागी न संतुष्टो नाशोको न निरामय: । न निर्विधित्सो नावृत्तो नापवृत्तोडस्ति कश्नन,वास्तवमें इस जगत्के भीतर न कोई त्यागी है न संतुष्ट, न शोकहीन है न नीरोग। न तो कोई पुरुष कर्म करनेकी इच्छासे सर्वथा शून्य है, न आसक्तिसे रहित है और न सर्वथा कर्मका त्यागी ही है
नैव त्यागी न सन्तुष्टो नाशोको न निरामयः । न निर्विधित्सो नावृत्तो नापवृत्तोऽस्ति कश्चन ॥
कपिल उवाच