मोक्षोपाय-निर्णयः
Determination of the Means to Liberation
हुमत्सेन उवाच यत्र यत्रैव शक््येरन् संयन्तुं समये प्रजा: । स तावान प्रोच्यते धर्मो यावन्न प्रतिलड्घ्यते,द्ुमत्सेनने कहा--बेटा! जहाँ-जहाँ भी प्रजाको धर्मकी मर्यादाके भीतर नियमन्त्रित करके रखा जा सके वहाँ-वहाँ वैसा करना धर्म ही बताया जाता है। जबतक कि धर्मका उल्लंघन नहीं किया जाता (तबतक ही वहाँ ऐसी व्यवस्था कर लेनी चाहिये)
Humatsena uvāca | yatra yatraiva śakyeran saṁyantuṁ samaye prajāḥ | sa tāvān procyate dharmo yāvanna pratilaghyate ||
द्यु मत्सेन उवाच—यत्र यत्रैव शक्येरन् संयन्तुं समये प्रजाः। स तावान प्रोच्यते धर्मो यावन्न प्रतिलङ्घ्यते॥
हुमत्सेन उवाच