Adhyāya 240: Indriya–Manas–Buddhi–Ātman — The Inner Hierarchy and Restraint (इन्द्रिय-मनस्-बुद्धि-आत्म-क्रमः)
योगसाधनामें अग्रसर होनेपर मोह, भ्रम और आवर्त आदि विष्न प्राप्त होते हैं। फिर दिव्य सुगन्ध आती है और दिव्य शब्दोंके श्रवण एवं दिव्य रूपोंके दर्शन होते हैं। नाना प्रकारके अद्भुत रस और स्पर्शका अनुभव होता है। इच्छानुकूल सर्दी और गर्मी प्राप्त होती है तथा वायुरूप होकर आकाशमें चलने-फिरनेकी शक्ति आ जाती है ।। प्रतिभामुपसर्गाश्चाप्युपसंगृह योगत: । तांस्तत्त्वविदनादृत्य आत्मन्येव निवर्तयेत्,सत्त्वसंसेवनाद धीरो निद्रामुच्छेत्तुमरहति । विद्वानोंने योगके जो काम, क्रोध, लोभ, भय और पाँचवाँ स्वप्र--ये पाँच दोष बताये हैं उनका पूर्णतया उच्छेद करे। इनमेंसे क्रोधको शम (मनोनिग्रह) के द्वारा जीते, कामको संकल्पके त्यागद्वारा पराजित करे तथा धीर पुरुष सत्वगुणका सेवन करनेसे निद्राका उच्छेद कर सकता है प्रतिभा बढ़ जाती है। दिव्य भोग अपने आप उपस्थित हो जाते हैं। इन सब सिद्धियोंको योगबलसे प्राप्त करके भी तत्त्ववेत्ता योगी उनका आदर न करे; क्योंकि ये सब योगके विघ्न हैं। अत: मनको उनकी ओरसे लौटाकर आत्मामें ही एकाग्र करे
vyāsa uvāca | pratibhām upasargāś cāpy upasaṃgṛhya yogataḥ | tāṃs tattvavid anādṛtya ātmany eva nivartayet | sattvasaṃsevanād dhīro nidrām ucchettum arhati |
व्यास उवाच—योगतः समुपसंगृह्य प्रतिभामुपसर्गांश्च तथा दिव्यगन्धान् दिव्यशब्दान् दिव्यरूपदर्शनानि नानाविधाद्भुतरसस्पर्शान् च, तत्त्वविद् तान् नाभिनन्देत्; एते हि योगविघ्ना इति मत्वा मनः तेषु निवर्त्यात्मन्येव प्रतिष्ठापयेत्। सत्त्वसंसेवनाद् धीरः निद्रामुच्छेत्तुमर्हति, जागरूकः स्वाध्यायध्याननिष्ठो भवति।
व्यास उवाच
Even if yoga produces brilliance, powers, or unusual experiences, a truth-knower should not cling to them. They are distractions; the mind must be withdrawn from them and fixed in the Self. Cultivating sattva supports wakeful clarity and helps overcome torpor.
In Vyāsa’s instruction within Śānti Parva, the discussion turns to the yogin’s inner path: as practice deepens, various extraordinary phenomena may arise. Vyāsa frames these as impediments and advises the practitioner to disregard them and re-center attention on the Ātman, using sattva to sustain alertness.