आपद्धर्मे राज्ञः नीतिः — Bharadvāja’s Counsel on Crisis-Statecraft (Śānti Parva 138)
ततः प्रसृततोयं त॑ प्रसमीक्ष्य जलाशयम् । बबन्धुर्विविधैयोगैर्मत्स्यान् मत्स्योपजीविन:,तदनन्तर मछलियोंसे ही जीविका चलानेवाले मछलीमारोंने जब यह देखा कि जलाशयका जल प्राय: बाहर निकल चुका है, तब उन्होंने अनेक उपायोंद्वारा वहाँकी सब मछलियोंको फँसा लिया
ततः प्रसृततोयं तं प्रसमीक्ष्य जलाशयम् । बबन्धुर्विविधैर्योगैर्मत्स्यान् मत्स्योपजीविनः ॥
भीष्म उवाच