Jaitrya-nimitta: Signs of Prospective Victory and the Priority of Conciliation (जयलक्षण-निमित्त तथा सान्त्व-प्रधान नीति)
गोमायवश्चानुकूला बलगृध्रा श्व सर्वश: । अर्हयेयुर्यदा सेनां तदा सिद्धिरनुत्तमा,यदि सेनाकी रणयात्राके समय सैनिकोंके पीछेसे मन्द-मन्द वायु प्रवाहित हो, सामने इन्द्रधनुषका उदय हो, बार-बार बादलोंकी छाया होती रहे और सूर्यकी किरणोंका भी प्रकाश फैलता रहे तथा गीदड़, गीध और कौए भी अनुकूल दिशामें आ जाया तो निश्चय ही उस सेनाको परम उत्तम सिद्धि प्राप्त होती है
gomāyavaścānukūlā balagṛdhrā śva sarvaśaḥ | arhayeyuryadā senāṃ tadā siddhiranuttamā ||
भीष्म उवाच—यदा सेनाया रणयात्राकाले पृष्ठतो मन्दो वायुः प्रवहति, अग्रे च इन्द्रधनुरुदेति, मुहुर् मेघच्छाया भवति सूर्यरश्मयश्च प्रसारं यान्ति, गोमायवो गृध्राः काकाश्चानुकूलदिग्भ्य आगच्छन्ति—तदा सा सेना परमामनुत्तमां सिद्धिमवाप्नोतीति।
भीष्म उवाच