दुर्योधन-कर्ण-संवादः
Duryodhana–Karna Dialogue on Vyūha-bheda and Daiva
कृष्णसर्पो यथा मुक्तो वल्मीकं नृपसत्तम । तथात्यगान्महीं बाणो भित्त्वा कैकेयमाहवे,नृपश्रेष्ट जैसे काला साँप बाँबीमें प्रवेश करता है, उसी प्रकार द्रोणाचार्यके धनुषसे छूटा हुआ वह बाण युद्धस्थलमें केकयराजकुमार बृहत्क्षत्रको विदीर्ण करके पृथ्वीमें घुस गया
कृष्णसर्पो यथा मुक्तो वल्मीकं नृपसत्तम, तथात्यगान्महीं बाणो भित्त्वा कैकेयमाहवे।
संजय उवाच