सर्वस्मिन् मानुषे लोके वेत्त्येको हि धनंजय: । कृष्णो वा देवकीपुत्रो नान्यो वेदेह कश्चन,“इस संसारमें ऐसा पराक्रम करनेवाला दूसरा कोई नहीं है। आग्नेय, वारुण, सौम्य, वायव्य, वैष्णव, ऐन्द्र, पाशुपत, ब्राह्म, पारमेष्ठ्य, प्राजापत्य, धात्र, त्वाष्ट, सावित्र और वैवस्वत आदि सम्पूर्ण दिव्यास्त्रोंको इस समस्त मानव-जगतूमें एकमात्र अर्जुन अथवा देवकीनन्दन भगवान् श्रीकृष्ण जानते हैं। दूसरा कोई यहाँ इन अस्त्रोंको नहीं जानता है
sarvasmin mānuṣe loke vetty eko hi dhanañjayaḥ | kṛṣṇo vā devakīputro nānyo vedeha kaścana ||
सर्वस्मिन् मानुषे लोके वेत्त्येको हि धनञ्जयः । कृष्णो वा देवकीपुत्रो नान्यो वेदेह कश्चन ॥
संजय उवाच