तस्मिंस्तु दशमे प्राप्ते दिवसे भरतर्षभ । भीष्मेणैकेन मत्स्येषु पज्चालेषु च संयुगे,शिक्षाबलेन निहतं पित्रा तव विशाम्पते । भरतश्रेष्ठ] उस दसवें दिनके आनेपर एकमात्र भीष्मने युद्धमें मत्स्य और पांचालदेशकी सेनाओंके अगणित हाथी, घोड़ोंको मारकर सात महारथियोंका वध कर डाला। प्रजानाथ! फिर पाँच हजार रथियोंका वध करके आपके पितृतुल्य भीष्मने अपने अस्त्र-शिक्षाबलसे उस महायुद्धमें चौदह हजार पैदल सिपाहियों, एक हजार हाथियों और दस हजार घोड़ोंका संहार कर डाला
sañjaya uvāca |
tasmiṃstu daśame prāpte divase bharatarṣabha |
bhīṣmeṇaikena matsyeṣu pāñcāleṣu ca saṃyuge |
śikṣābalena nihataṃ pitrā tava viśāṃpate ||
तस्मिंस्तु दशमे प्राप्ते दिवसे भरतर्षभ । भीष्मेणैकेन मत्स्येषु पाञ्चालेषु च संयुगे । शिक्षाबलेन निहतं पित्रा तव विशाम्पते ।
संजय उवाच