उत्तङ्कोपाख्यानम् — Maṇi-Kuṇḍala Retrieval and Entry into Nāgaloka
Chapter 57
द्विजश्रेष्ठ! रानी उत्तम व्रतका पालन करनेवाली हैं। जब आप उनसे इस प्रकार कहेंगे, तब वे मेरी आज्ञा मानकर दोनों कुण्डल आपको दे देंगी, इसमें संशय नहीं है” ।।
उत्तङ्क उवाच—क्व पत्नी भवतः शक्या मया द्रष्टुं नरेश्वर । स्वयं वा भवान् पत्नीं किमर्थ नोपसर्पति ॥
उत्तड्ुक उवाच