Vāraṇāvata-prasaṃsā and the Pāṇḍavas’ Departure (वरणावत-प्रशंसा तथा पाण्डव-प्रयाणम्)
स एव सुमहातेजा: साम्प्रतं प्रतिपत्स्यते । द्रोण बोले--तुम सब लोग भीष्मजीके पास जाकर मेरे रूप और गुणोंका परिचय दो। वे महातेजस्वी भीष्मजी ही मुझे इस समय पहचान सकते हैं
sa eva sumahātejāḥ sāmprataṃ pratipatsyate |
स एव सुमहातेजाः साम्प्रतं प्रतिपत्स्यते ।
वैशम्पायन उवाच