नलस्य बाहुकत्वेन ऋतुपर्णनगरप्रवेशः
Nala as Bāhuka enters Ṛtuparṇa’s city
पतिमन्वेषतीमेकां कृपणां शोककर्षिताम् । आश्वासय मृगेन्द्रेह यदि दृष्टस्त्वया नल:,“मृगेन्द्र! मैं इस वनमें अकेली पतिकी खोजमें भटक रही हूँ तथा शोकसे पीड़ित एवं दीन हो रही हूँ। यदि आपने नलको यहाँ कहीं देखा हो तो उनका कुशल-समाचार बताकर मुझे आश्वासन दीजिये
О владыка зверей! Я одна ищу мужа, блуждаю в этом лесу, жалкая, истерзанная скорбью. Если ты где-либо видел Налу, поведай мне о его благополучии и утешь меня.
बृहृदश्च उवाच