Arjuna’s Himalayan Departure and the Commencement of Severe Tapas
Janamejaya’s Inquiry; Sages Approach Śiva
दयितं तव देवेश तापसालयमुत्तमम् | प्रसादये त्वां भगवन् सर्वलोकनमस्कृतम्,देवेश्वरर यह शैल-शिखर तपस्वियोंका उत्तम आश्रय तथा आपका प्रिय निवासस्थान है। प्रभो! सम्पूर्ण जगत् आपके चरणोंमें वन्दना करता है। मैं आपसे यह प्रार्थना करता हूँ कि आप मुझपर प्रसन्न हों
«О Владыка богов, эта вершина — наилучшее прибежище подвижников и твоё любимое жилище. О Господь, весь мир преклоняется у твоих стоп. Молю, будь милостив ко мне.»
अजुन उवाच