वनप्रस्थानम् (Departure for the Forest) — Āraṇyaka-parva, Adhyāya 24
त॑ सत्यसंधं सहसाभिपेतु- दिंदृक्षवश्चारणसिद्धसड्घा: । वनौकससश्षापि नरेन्द्रसिंहं मनस्थविनं तं परिवार्य तस्थु:,उस समय उन सत्यप्रतिज्ञ मनस्वी राजसिंह युधिष्ठिरको देखनेकी इच्छासे सहसा बहुत- से चारण, सिद्ध एवं वनवासी महर्षि आये और उन्हें घेरकर खड़े हो गये
В то время, желая увидеть Юдхиштхиру — «льва среди людей», стойкого в обете истины, — внезапно пришли многие чараны, сиддхи и лесные махариши и, окружив его, остановились вокруг.
वैशम्पायन उवाच