Kuvalāśva’s Lineage and Uttaṅka’s Petition concerning Dhundhu (धुन्धु-प्रसङ्गः)
अथाश्वस्त: स बिसमृणालमश्चायाग्रतो निक्षिप्य पुष्करिणीतीरे संविवेश | ततः शयानो मधुरं गीतमशूणोत्,“जल पीकर जब वे कुछ आश्वस्त हुए, तब घोड़ेके आगे कुछ कमलकी नालें डालकर स्वयं उस सरोवरके तटपर लेट गये। लेटे-ही-लेटे उनके कानोंमें कहींसे मधुर गीतकी ध्वनि सुनायी पड़ी
Напившись и немного придя в себя, он бросил перед конём несколько стеблей лотоса, а сам прилёг на берегу пруда. И, лёжа, услышал откуда-то сладостное пение.
वैशम्पायन उवाच