इन्द्रप्रशंसा, दिव्योपकरणदानं, गन्धमादनसमागमश्च
Indra’s Commendation, Bestowal of Divine Insignia, and the Gandhamādana Reunion
मार्गान् बहुविधांस्तत्र विचेरुर्वातरंहस: । सुसंयता मातलिना प्रामथ्नन्त दिते: सुतान्,सारथिसे प्रेरित होकर वे अश्व नाना प्रकारकी चालें दिखाते हुए वायुके समान वेगसे चलने लगे। मातलिने उन्हें अच्छी तरह काबूमें कर रखा था। उन सबने वहाँ दितिके पुत्रोंको रौंद डाला
Там кони, стремительные как ветер, носились по разным путям, показывая множество ходов. Матали держал их в строгой узде; и, по воле возничего, они растоптали сыновей Дити на том месте.
अजुन उवाच