द्रुपदवाक्यं
Drupada’s Counsel on Conciliation and Alliance Mobilization
बृहन्तको भी बुलाया जाय। राजा सेनाबिन्दु, सेनजित, प्रतिविन्ध्य, चित्रवर्मा, सुवास्तुक, बाह्नीक, मुंजकेश, चैद्यराज, सुपार्श्व, सुबाहु, महारथी पौरव, शकनरेश, पह्नवराज तथा दरददेशके नरेश भी निमन्त्रित किये जाने चाहिये। सुरारि, नदीज, भूपाल क्णवेष्ट, नील, वीरधर्मा, पराक्रमी भूमिपाल, दुर्जय दन्तवक्त्र, रुकमी, जनमेजय, आषाढ, वायुवेग, राजा पूर्वपाली, भूरितेजा, देवक, पुत्रोंसहित एकलव्य, करूषदेशके बहुत-से नरेश, पराक्रमी क्षेमधूर्ति, काम्बोजनरेश, ऋषिकदेशके राजा, पश्चिम द्वीपवासी नरेश, जयत्सेन, काश्य, पंचनद प्रदेशके राजा, दुर्धर्ष क्राथपुत्र, पर्वतीय नरेश, राजा जनकके पुत्र, सुशर्मा, मणिमान्ू, योतिमत्सक, पांशुराज्यके अधिपति, पराक्रमी धृष्टकेतु, तुण्ड, दण्डधार, वीर्यशाली बृहत्सेन, अपराजित, निषादराज, श्रेणिमान्, वसुमान्ू, बृहद्धल, महौजा, शत्रुनगरीपर विजय पानेवाले बाहु, पुत्रसहित पराक्रमी राजा समुद्रसेन, उद्भव, क्षेमक, राजा वाटधान, श्रुतायु, दृढायु, पराक्रमी शाल्व-पुत्र, कुमार तथा युद्धदुर्मद कलिंगराज--इन सबके पास शीघ्र ही रण-निमन्त्रण भेजा जाय; मुझे यही ठीक जान पड़ता है ॥। १३-- २४ ।। अयं च ब्राह्मणो विद्वान् मम राजन् पुरोहित: । प्रेष्यतां धृतराष्ट्राय वाक्यमस्मै प्रदीयताम्,मत्स्यराज! ये मेरे पुरोहित दिद्वान् ब्राह्मण हैं, इन्हें धृतराष्ट्रके पास भेजिये और वहाँके लिये उचित संदेश दीजिये
ayaṃ ca brāhmaṇo vidvān mama rājan purohitaḥ | preṣyatāṃ dhṛtarāṣṭrāya vākyam asmai pradīyatām |
Друпада сказал: «И этот учёный брахман — мой царский жрец. Пусть его отправят к Дхритараштре и вручат ему подобающее послание. О царь матсьев, так и следует поступить».
दुपद उवाच
The verse highlights dharmic statecraft: a king should communicate through a qualified, trustworthy envoy—here a learned purohita—so that the message carries moral authority, restraint, and legitimacy in a tense political situation.
In the Udyoga Parva’s mobilization and negotiations, Drupada advises the Matsya king to send Drupada’s learned royal priest to Dhṛtarāṣṭra as a messenger, delivering a suitable formal communication as alliances and war preparations intensify.