राजधर्मः—प्रमादवर्जनं, दण्डनीतिः, दुर्बलरक्षणम्
Royal Dharma: Vigilance, Just Punishment, Protection of the Vulnerable
संविभज्य यदा भूड्क्ते नामात्यानवमन्यते । निहन्ति बलिन दृप्तं स राज्ञो धर्म उच्यते,राजा जब उसको यथायोग्य विभाग देकर स्वयं उपभोग करता है, मन्त्रियोंका अनादर नहीं करता है और बलके घमंडमें चूर रहनेवाले दुष्ट पुरुष या शत्रुको मार डालता है, तब उसका यह सब कार्य राजधर्म कहलाता है
Когда царь справедливо распределяет долю и лишь затем сам пользуется ею, не унижает министров и поражает злодея или врага, опьянённого силой и дерзостью, — всё это называется царской дхармой, раджадхармой.
उतथ्य उवाच