Śuka’s Guṇa-Transcendence and Vyāsa’s Consolation (शुकगति-वर्णनम्)
कासि कस्य कुतश्चरैति त्ववाहमभिचोदिता । तत्रोत्तरमिदं वाक््यं राजन्नेकमना: शृणु,महाराज! आपने मुझसे पूछा था कि आप कौन हैं, किसकी हैं और कहाँसे आयी हैं? अतः इसके उत्तरमें मेरा यह कथन एकचित्त होकर सुनिये
kāsi kasya kutaś caraiti tvāham abhichoditā | tatrottaram idaṁ vākyaṁ rājann ekamanāḥ śṛṇu ||
Бхишма сказал: «Ты спросил меня: кто ты, чья ты и откуда пришла? Потому, о царь, выслушай, собрав ум воедино, этот мой единственный ответ».
भीष्य उवाच