Śaraṇāgata-Atithi-Dharma in the Kapota Narrative (कपोत-आख्यानम्—शरणागतधर्मः)
श्षपच उवाच गोपनीयमिदं दुःखमिति मे निश्चिता मतिः । दुष्कृतो5ब्राह्मण: सत्र यस्त्वामहमुपालभे,चाण्डालने कहा--यह कुत्तेका मांस खाना आपके लिये अत्यन्त दुःखदायक पाप है। इससे आपको बचना चाहिये। यह मेरा निश्चित विचार है, इसीलिये मैं महान् पापी और ब्राह्मणेतर होनेपर भी आपको बारंबार उलाहना दे रहा हूँ। अवश्य ही यह धर्मका उपदेश करना मेरे लिये धूर्ततापूर्ण चेष्टा ही है
śvapaca uvāca gopanīyam idaṃ duḥkham iti me niścitā matiḥ | duṣkṛto ’brāhmaṇaḥ satra yas tvām aham upālabhe ||
Швапача сказал: «Я твёрдо убеждён: эту скорбную вещь следует скрывать. И всё же, хотя я грешник и не брахман, я здесь укоряю тебя. Воистину, для такого, как я, поучать в дхарме — уже само по себе хитрая дерзость».
श्षपच उवाच