Śalya-hatānantarāṇi: Madrarāja-padānugānāṃ praskandana and the Pandava counter-encirclement (शल्यहतानन्तराणि—मद्रराजपदानुगानां प्रस्कन्दनम्)
प्रगृह्दा खड॒गं च रथान्महात्मा प्रस्कन्द्य कुन्तीसुतमभ्यधावत् । छित्त्वा रथेषां नकुलस्य सो5थ युधिष्ठिरें भीमबलो<5भ्यधावत्,उन बाणोंसे शल्यको मोहित हुआ देख भीमसेनने उनके कवचको भी काट डाला। भीमसेनके द्वारा अपना कवच कट जानेपर भयंकर बलशाली महामनस्वी मद्रराज शल्य सहस््र तारोंके चिहसे सुशोभित ढाल और तलवार लेकर उस रथसे कूद पड़े और कुन्तीपुत्रकी ओर दौड़े। उन्होंने नकुलके रथका हरसा काटकर युधिष्ठिरपर धावा किया
pragṛhya khaḍgaṃ ca rathān mahātmā praskandya kuntīsutam abhyadhāvat | chittvā ratheṣāṃ nakulasya so 'tha yudhiṣṭhire bhīmabalo 'bhyadhāvat ||
Санджая сказал: Взяв меч, высокодушный Шалья спрыгнул с колесницы и бросился на сына Кунти. Затем, рассёкши упряжь колесницы Накулы, могучерукий воин устремился прямо на Юдхиштхиру.
संजय उवाच