दुर्योधनस्य बलिवर्णनम् — Duryodhana’s Description of Tribute at the Rājasūya
सोऊहं न स्त्री न चाप्यस्त्री न पुमान्नापुमानपि । योऊहं तां मर्षयाम्यद्य तादृशीं श्रियमागताम्,मैं इस समय न तो स्त्री हूँ, न अस्त्रबलसे सम्पन्न हूँ, न पुरुष हूँ और न नपुंसक ही हूँ, तो भी अपने शत्रुओंके पास आयी हुई वैसी उत्कृष्ट सम्पत्तिको देखकर भी चुपचाप सहन कर रहा हूँ?
so ’haṁ na strī na cāpy astrī na pumān nāpumān api | yo ’haṁ tāṁ marṣayāmy adya tādṛśīṁ śriyam āgatām ||
Дурьодхана сказал: «Кто же я теперь? Я не женщина и не безоружный, не мужчина и даже не евнух — и всё же по сей день молча терплю, видя, как столь блистательное благополучие достаётся моим врагам!»
दुर्योधन उवाच