अभश्मयुद्धेषु कुशला नैतज्जानाति सात्यकि: । अश्मयुद्धमजानन्तं घ्नतैनं युद्धकार्मुकम्,“वीरो! तुमलोग प्रस्तरोंद्वारा युद्ध करनेमें कुशल हो। सात्यकिको इस कलाका ज्ञान नहीं है। प्रस्तरयुद्धको न जानते हुए भी युद्धकी इच्छा रखनेवाले इस शत्रुकोी तुमलोग मार डालो
«Храбрецы! Вы искусны в каменном бою. Сатьяки этого искусства не знает. Убейте этого врага — лучника, жаждущего битвы, — хоть он и не ведает каменной брани!»
संजय उवाच