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Shloka 24

नारदेन धृतराष्ट्रगतिवर्णनम् | Nārada’s Account of Dhṛtarāṣṭra’s Future Course

न कृतं यै: पुरा कैश्वित्‌ कर्म लोके महर्षिभि: । आश्चर्यभूतं तपस: फलं तद्‌ दर्शयामि व:,'पूर्वकालके किन्हीं महर्षियोंने संसारमें अबतक जो चमत्कारपूर्ण कार्य नहीं किया था, वह भी आज मैं कर दिखाऊँगा। आज मैं तुम्हें अपनी तपस्याका आश्चर्यजनक फल दिखलाता हूँ

«То, чего прежде ни один великий риши не совершал в мире — деяние дивное, — сегодня я покажу вам. Сегодня я явлю вам изумительный плод моего тапаса (подвижничества)».

वैशम्पायन उवाच