आदि पर्व — द्रौपदी-स्वयंवरानन्तरवृत्तम्
Aftermath of Draupadī’s Svayaṃvara
अत-४-#कात पज्चाशीर्त्याधिकशततमो< ध्याय: धृष्टद्युम्नका द्रौपदीको स्वयंवरमें आये हुए राजाओंका परिचय देना धृष्टह्युम्न उवाच दुर्योधनो दुर्विषहो दुर्मुखो दुष्प्रधर्षण: । विविंशतिर्विकर्णश्र सहो दुःशासनस्तथा,धृष्ट्युम्नने कहा--बहिन! यह देखो--दुर्योधन, दुर्विषह, दुर्मुख, दुष्प्रधर्षण, विविंशति, विकर्ण, सह, दुःशासन, युयुत्सु, वायुवेग, भीमवेगरव, उग्रायुध, बलाकी, करकायु, विरोचन, कुण्डक, चित्रसेन, सुवर्चा, कनकध्वज, ननन््दक, बाहुशाली, तुहुण्ड तथा विकट--ये और दूसरे भी बहुत-से महाबली धूृतराष्ट्रपुत्र जो सब-के-सब वीर हैं, तुम्हें प्राप्त करनेके लिये कर्णके साथ यहाँ पधारे हैं इस प्रकार श्रीमहाभारत, आदिपव॑के अन्तर्गत स्वयंवरपर्वमें रजाओके नामका परिचयविषयक एक सौ पचासीवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥/ १८५ ॥ ऑपन-माज बछ। अऑसि--छऋाय षडशीर्त्याधेकशततमो< ध्याय: राजाओंका लक्ष्यवेधके लिये उद्योग और असफल होना वैशम्पायन उवाच तेडलंकृता: कुण्डलिनो युवान: परस्परं स्पर्धमाना नरेन्द्रा: । अस्त्रं बल॑ चात्मनि मन्यमाना: सर्वे समुत्पेतुरुदायुधास्ते
dhṛṣṭadyumna uvāca | duryodhano durviṣaho durmukho duṣpradharṣaṇaḥ | viviṁśatir vikarṇaś ca saho duḥśāsanas tathā ||
Dhṛṣṭadyumna disse: “Irmã, olha—eis Duryodhana, Durviṣaha, Durmukha, Duṣpradharṣaṇa, Viviṁśati, Vikarṇa, Saha e Duḥśāsana.”
धृष्टह्युम्न उवाच