अध्याय ८२ — केशवप्रयाणे निमित्तदर्शनम्
Omens and Reception During Keśava’s Departure
श्रोतुमिच्छाम गोविन्द सत्यानि च हितानि च । “गोविन्द! माधव! उस सभामें आपके तथा भीष्म आदिके मुखसे जो दिव्य, सत्य एवं हितकर वचन प्रकट होंगे, उन सबको हमलोग सुनना चाहते हैं |। ७० है ।। आपृष्टोडसि महाबाहो पुनर्द्रक्ष्यामहे वयम्,“महाबाहो! अब हमलोग आपसे पूछकर विदा ले रहे हैं, पुन: आपका दर्शन करेंगे। वीर! आपकी यात्रा निर्विष्न हो। जब सभामें पधारकर आप दिव्य आसनपर बैठे होंगे, उसी समय बल और तेजसे सम्पन्न आपके श्रीअंगोंका हम पुनः दर्शन करेंगे”
śrotum icchāma govinda satyāni ca hitāni ca | āpṛṣṭo 'si mahābāho punar drakṣyāmahe vayam ||
ਹੇ ਗੋਵਿੰਦ! ਅਸੀਂ ਸੱਚੇ ਅਤੇ ਹਿਤਕਾਰੀ ਬਚਨ ਸੁਣਨਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹਾਂ। ਹੇ ਮਹਾਬਾਹੋ! ਤੇਰੀ ਆਗਿਆ ਲੈ ਕੇ ਅਸੀਂ ਵਿਦਾ ਹੁੰਦੇ ਹਾਂ; ਫਿਰ ਤੈਨੂੰ ਦਰਸ਼ਨ ਕਰਾਂਗੇ।
वैशम्पायन उवाच