Ādi-parva, Adhyāya 73: Devayānī–Śarmiṣṭhā Dispute, Confinement in the Well, and Yayāti’s Rescue
सत्यं मे प्रतिजानीहि यथा वक्ष्याम्यहं रह: । मयि जायेत य: पुत्र: स भवेत् त्वदनन्तर:,और उसका पालन करनेके लिये मुझसे सच्ची प्रतिज्ञा कीजिये। वह शर्त क्या है, यह मैं एकान्तमें आपसे कह रही हूँ--महाराज दुष्यन्त! मेरे गर्भसे आपके द्वारा जो पुत्र उत्पन्न हो, वही आपके बाद युवराज हो, ऐसी मेरी इच्छा है। यह मैं आपसे सत्य कहती हूँ। यदि यह शर्त इसी रूपमें आपको स्वीकार हो तो आपके साथ मेरा समागम हो सकता है
satyaṃ me pratijānīhi yathā vakṣyāmy ahaṃ rahaḥ | mayi jāyeta yaḥ putraḥ sa bhavet tvad-anantaraḥ ||
ਸ਼ਕੁੰਤਲਾ ਨੇ ਆਖਿਆ—ਮੈਨੂੰ ਸੱਚੀ ਪ੍ਰਤਿਗਿਆ ਦਿਓ; ਮੈਂ ਇਕਾਂਤ ਵਿੱਚ ਜੋ ਕਹਿੰਦੀ ਹਾਂ, ਉਹ ਸੁਣੋ। ਮੇਰੇ ਗਰਭ ਤੋਂ ਤੁਹਾਡੇ ਦੁਆਰਾ ਜੋ ਪੁੱਤਰ ਜੰਮੇ, ਉਹੀ ਤੁਹਾਡੇ ਪਿੱਛੋਂ ਵਾਰਸ (ਯੁਵਰਾਜ) ਹੋਵੇ।
दुष्यन्त उवाच