ततः कुन्तीसुतो राजा प्रचिन्त्य पुरुषर्षभ: । समुत्थाय महाबाहुर्दहुमानेन चेतसा,तदनन्तर कुन्तीपुत्र पुरुषरत्न महाबाहु राजा युधिष्ठिर बहुत देरतक सोच-विचार करके उठे और जलते हुए हृदयसे उन्होंने उस विशाल वनमें प्रवेश किया, जहाँ मनुष्योंकी आवाजतक नहीं सुनायी देती थी। वहाँ रुरु मृग, वराह तथा पक्षियोंके समुदाय ही निवास करते थे
tataḥ kuntīsuto rājā pracintya puruṣarṣabhaḥ | samutthāya mahābāhur dahumānēna cetasā ||
ତାପରେ କୁନ୍ତୀପୁତ୍ର ରାଜା ଯୁଧିଷ୍ଠିର—ପୁରୁଷଶ୍ରେଷ୍ଠ—ଦୀର୍ଘ ସମୟ ଗଭୀର ଚିନ୍ତା କରି ଉଠିଲେ; ଦହୁଥିବା ଚିତ୍ତ ସହ ଆଗେଇଲେ।
यक्ष उवाच