विदुरस्य कृष्णं प्रति शमोपदेशः
Vidura’s Counsel to Krishna on the Limits of Peace
न च तत् कारणं विद्यो यस्मिन् नो मधुसूदन । पूजां कृतां प्रीयमाणैर्नामंस्था: पुरुषोत्तम,“मधुदैत्यका विनाश करनेवाले पुरुषोत्तम! हमें ऐसा कोई कारण नहीं जान पड़ता, जिसके होनेसे आप हमारी प्रेमपूर्वक अर्पित की हुई पूजा ग्रहण न कर सकें
na ca tat kāraṇaṁ vidmo yasmin no madhusūdana | pūjāṁ kṛtāṁ prīyamāṇair nāma sthāḥ puruṣottama ||
“ହେ ମଧୁସୂଦନ! ଆମେ ପ୍ରେମରେ ଆନନ୍ଦିତ ହୋଇ ଯେ ପୂଜା କରିଛୁ, ତାହା ଆପଣ ଗ୍ରହଣ ନ କରିବେ—ଏପରି କାରଣ କିଛି ଆମେ ଜାଣୁନାହୁଁ। ହେ ପୁରୁଷୋତ୍ତମ! ଏହି ଶ୍ରଦ୍ଧାରୁ ମୁହଁ ଫେରାନ୍ତୁ ନାହିଁ।”
वैशम्पायन उवाच