Kṛṣṇa at Duryodhana’s House: Refusal of Hospitality and Departure to Vidura (कृष्णस्य धार्तराष्ट्रनिवेशनगमनम्)
साब्रवीत् कृष्णमासीनं कृतातिथ्यं युधां पतिम् । बाष्पगद्गदपूर्णेन मुखेन परिशुष्यता,उन्होंने योद्धाओंके स्वामी श्रीकृष्णका अतिथि-सत्कार किया। जब वे आतिथ्य ग्रहण करके आसनपर विराजमान हुए, तब सूखे मुँह और अश्रुगदगद कण्ठसे कुन्तीदेवी इस प्रकार बोलीं--
ଅତିଥି-ସତ୍କାର କରି, ଯୁଦ୍ଧମାନଙ୍କ ନାୟକ ଶ୍ରୀକୃଷ୍ଣ ଆସନରେ ଉପବିଷ୍ଟ ହେଲେ; ତେବେ ମୁଖ ଶୁଷ୍କ ହେଉଥିବା ଓ ଅଶ୍ରୁରେ ଗଦ୍ଗଦ କଣ୍ଠରେ ପୃଥା (କୁନ୍ତୀ) ତାଙ୍କୁ କହିଲେ।
वैशम्पायन उवाच