Udyoga-parva Adhyāya 71 — Kṣatra-dharma Counsel, Public Legitimacy, and Mobilization
श्रीभगवानुवाच अयमस्मि महाबाहो ब्रूहि यत् ते विवक्षितम् | करिष्यामि हि तत् सर्व यत् त्वं वक्ष्यसि भारत,श्रीभगवान् बोले--महाबाहो! यह मैं आपकी सेवाके लिये सर्वदा प्रस्तुत हूँ। आप जो कुछ कहना चाहते हों, कहें। भारत! आप जो-जो कहेंगे, वह सब कार्य मैं निश्चय ही पूर्ण करूँगा
śrībhagavān uvāca | ayam asmi mahābāho brūhi yat te vivakṣitam | kariṣyāmi hi tat sarvaṃ yat tvaṃ vakṣyasi bhārata ||
ଶ୍ରୀଭଗବାନ କହିଲେ—“ମହାବାହୋ! ମୁଁ ଏଠାରେ ପ୍ରସ୍ତୁତ; ତୁମେ ଯାହା କହିବାକୁ ଚାହୁଁଛ, କହ। ହେ ଭାରତ! ତୁମେ ଯାହା ଆଦେଶ କରିବ, ସେ ସବୁ ମୁଁ ନିଶ୍ଚୟ ପୂରଣ କରିବି।”
वैशम्पायन उवाच