उद्योगपर्व — धृतराष्ट्रस्य दुर्योधनप्रति शक्तिस्मारक-उपदेशः
Udyoga Parva 63: Dhṛtarāṣṭra’s Counsel Reminding Duryodhana of Opponent Strength
एकेन रथमास्थाय पृथिवी येन निर्जिता । भीष्मद्रोणप्रभृतय: संत्रस्ता: साधुयायिन:,जिस वीरने अकेले ही रथपर बैठकर सारी पृथ्वीपर विजय पायी है, विराटनगरपर चढ़ाई करने गये हुए भीष्म और द्रोण-जैसे महान् योद्धाओंको भी जिसने भयभीत करके भगा दिया है, उसके सामने आपका पुत्र क्या पराक्रम कर सकता है? यह आप ही देखिये। आज भी वह वीर आपकी मैत्रीपूर्ण दृष्टिकी प्रतीक्षा कर रहा है और आपकी आज्ञासे वह कौरवोंका सारा अपराध क्षमा कर सकता है
ekena ratham āsthāya pṛthivī yena nirjitā | bhīṣma-droṇa-prabhṛtayaḥ saṁtrastāḥ sādhuyāyinaḥ ||
ଯେ ବୀର ଏକାକୀ ରଥାରୂଢ଼ ହୋଇ ପୃଥିବୀକୁ ଜୟ କରିଛି, ଏବଂ ଧର୍ମଯାତ୍ରାରେ ଅଗ୍ରସର ଭୀଷ୍ମ-ଦ୍ରୋଣ ପ୍ରମୁଖମାନେ ମଧ୍ୟ ଯାହାଙ୍କ ସମ୍ମୁଖରେ ଭୟଭୀତ ହୋଇ ପଛକୁ ହଟିଥିଲେ—ତାଙ୍କ ବିରୋଧରେ ଆପଣଙ୍କ ପୁତ୍ର କେଉଁ ପରାକ୍ରମ ଦେଖାଇବ? ଏହା ଆପଣେ ନିଜେ ବିଚାର କରନ୍ତୁ। ଆଜି ମଧ୍ୟ ସେ ମହାବୀର ଆପଣଙ୍କ ମୈତ୍ରୀଦୃଷ୍ଟିର ପ୍ରତୀକ୍ଷା କରୁଛନ୍ତି; ଏବଂ ଆପଣଙ୍କ ଆଜ୍ଞାରେ କୌରବମାନଙ୍କ ସମସ୍ତ ଅପରାଧ କ୍ଷମା କରିପାରିବେ।
विदुर उवाच