उद्योगपर्व — अध्याय 33: धृतराष्ट्र-विदुर संवादः (विदुरनीतिः)
किन्नु मे स्यादिदं कृत्वा किन्नु मे स्यादकुर्वतः । इति कर्माणि संचिन्त्य कुर्याद् वा पुरुषो न वा,इसे करनेसे मेरा क्या लाभ होगा और न करनेसे क्या हानि होगी--इस प्रकार कर्मोंके विषयमें भलीभाँति विचार करके फिर मनुष्य (कर्म) करे या न करे
kinnu me syād idaṃ kṛtvā kinnu me syād akurvataḥ | iti karmāṇi saṃcintya kuryād vā puruṣo na vā ||
ଏହା କଲେ ମୋର କ’ଣ ଲାଭ ହେବ, ନ କଲେ କ’ଣ କ୍ଷତି ହେବ—ଏପରି କର୍ମ ବିଷୟରେ ଭଲଭାବେ ଚିନ୍ତା କରି, ମଣିଷ କରିବ କି ନ କରିବ ନିଷ୍ପତ୍ତି ନେବା ଉଚିତ।
विदुर उवाच