Udyoga-parva Adhyāya 3 — Sātyaki on Inner Disposition, Legitimacy, and Coercive Readiness
समाहूय महात्मानं जितवन्तो$क्षकोविदा: | अनक्षकज्ञं यथाश्रद्धं तेषु धर्मजय: कुत:,महात्मा युधिष्ठिर जूआ खेलना नहीं जानते थे, तो भी जूएके खेलमें निपुण धूर्तोने उन्हें अपने घर बुलाकर अपने विश्वासके अनुसार हराया अथवा जीता है। यह उनकी धर्मपूर्वक विजय कैसे कही जा सकती है?
ମହାତ୍ମା ଯୁଧିଷ୍ଠିର ଦ୍ୟୁତକ୍ରୀଡାରେ ପାରଙ୍ଗତ ନଥିଲେ; ତଥାପି ଦ୍ୟୁତରେ ନିପୁଣ ଧୂର୍ତ୍ତମାନେ ତାଙ୍କୁ ନିଜ ଘରକୁ ଡାକି, ନିଜ ଚାଳ ଅନୁସାରେ ତାଙ୍କୁ ଜିତିଲେ। ଏପରି ଜୟକୁ ଧର୍ମଜୟ କିପରି କୁହାଯିବ?
वैशम्पायन उवाच