अम्बा–राम–भीष्म संवादः
Amba–Rama–Bhishma Dialogue on Vow and Refuge
ततो मामब्रवीद् राम: क्रोधसंरक्तलोचन: । जानीषे मां गुरुं भीष्म गृह्नलासीमां न चैव ह,तब परशुरामजीने क्रोधसे लाल आँखें करके मुझसे कहा--“महामते भीष्म! तुम मुझे अपना गुरु तो समझते हो; परंतु मेरा प्रिय करनेके लिये काशिराजकी इस कन्याको ग्रहण नहीं करते हो; किंतु कुरुनन्दन! ऐसा किये बिना तुम्हें शान्ति नहीं मिल सकती
tato mām abravīd rāmaḥ krodha-saṃrakta-locanaḥ | jānīṣe māṃ guruṃ bhīṣma gṛhṇalāsīmāṃ na caiva ha ||
ତାପରେ କ୍ରୋଧରେ ରକ୍ତବର୍ଣ୍ଣ ନୟନ ଥିବା ରାମ (ପରଶୁରାମ) ମୋତେ କହିଲେ—“ଭୀଷ୍ମ! ତୁମେ ମୋତେ ଗୁରୁ ଭାବେ ଜାଣ; କିନ୍ତୁ ମୋ ପ୍ରିୟାର୍ଥେ ଏହି କାଶୀରାଜକନ୍ୟାକୁ ଗ୍ରହଣ କରୁନାହଁ।”
राम उवाच