अम्बा–राम–भीष्म संवादः
Amba–Rama–Bhishma Dialogue on Vow and Refuge
निर्जितो<स्मीति वा ब्रूयात् कुर्याद् वा वचनं तव । कृतमस्या भवेत् कार्य कन्याया भृगुनन्दन,“महाबाहो! यह कन्या शरणमें आयी है; अतः आपको इसका त्याग नहीं करना चाहिये। भृगुनन्दन राम! यदि युद्धमें आपके बुलानेपर भीष्म सामने आकर अपनी पराजय स्वीकार करे अथवा आपकी बात ही मान ले तो इस कन्याका कार्य सिद्ध हो जायगा
nirjito 'smīti vā brūyāt kuryād vā vacanaṃ tava | kṛtam asyā bhavet kāryaṃ kanyāyā bhṛgunandana ||
ସେ ‘ମୁଁ ପରାଜିତ’ ବୋଲି କହୁ କିମ୍ବା ତୁମ ବଚନ ମାନୁ; ହେ ଭୃଗୁନନ୍ଦନ! ତେବେ ଏହି କନ୍ୟାର କାର୍ଯ୍ୟ ସିଦ୍ଧ ହେବ।
भीष्म उवाच