अम्बाया रामजामदग्न्यशरणगमनम्
Ambā Seeks Refuge with Rāma Jāmadagnya
सौभराजमुपेत्याहमवोचं दुर्वचं वच: । नच मां प्रत्यगृह्लात् स चारित््यपरिशड्कितः,तब सौभराजके पास जाकर मैंने उनसे ऐसी बातें कहीं जिन्हें अपने मुँहसे कहना स्त्रीजातिके लिये अत्यन्त दुष्कर होता है; परंतु मेरे चरित्रपर संदेह हो जानेके कारण उसने मुझे स्वीकार नहीं किया
ତେବେ ମୁଁ ସୌଭରାଜଙ୍କ ପାଖକୁ ଯାଇ ଏମିତି କଠୋର କଥା କହିଦେଲି, ଯାହା ନାରୀଜାତି ପାଇଁ ନିଜ ମୁଖରୁ କହିବା ଅତ୍ୟନ୍ତ ଦୁଷ୍କର; କିନ୍ତୁ ମୋ ଚରିତ୍ର ଉପରେ ସନ୍ଦେହ କରି ସେ ମୋତେ ଗ୍ରହଣ କଲା ନାହିଁ।
राम उवाच